*क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?*

शब्द,जहर जो धोल रहे,

राग-द्वेष जो दे रहे,

अमन-चैन और भाईचारा,

सब कुछ हमसे छीन रहे,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?

शब्द, जो हृदय को छेद रहे,

देश को खण्डित कर रहे,

सच को झूठ, झूठ को सच ;

साबित कर डंका पीट रहे,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी ?

जहाँ दायित्व का बोध नहीं,

हिंसा, वैमनस्यता, भड़ास निहित हो,

विध्वंसवाद शब्दों में लेकर,

अभिव्यक्ति बस हथियार बना हो,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी ?

जहाँअनुचित शब्द प्रहार बने हो,

विरोध, अहित और स्वार्थ लिप्त हो,

जहाँ मर्यादा मुख मोड़ गई हो,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?

‘बोल’ जो बोले जनहित को,

राष्ट्रप्रेम, समन्वय निहित हो,

संप्रभुता स्वछंद बनी हो,

अखण्ड, एकता प्रेम बना हो,

कोटि नमन ऐसी अभिव्यक्ति को,

कोटि नमन ऐसी अभिव्यक्ति को ।

स्वरचित- अनिल बिष्ट (कफोला )@copyright.

शिक्षा है दर्पण जीवन का

हिन्दी दिवस की मेरे सभी प्रिय स्नेही मित्रों को बहुत – बहुत बधाई यह हमारी राष्ट्र भाषा ही नहीं अपितु मातृ भाषा भी है हमें इसपर गर्व होना चाहिए और जन – जन तक इसे पहुंचाना चाहिए इसी सन्दर्भ में मैं अपनी कविताशिक्षा है दर्पण जीवन का प्रस्तुत कर रहा हूँ – शिक्षा है दर्पण जीवन का,

जन मूढ़ता दूर करो,

शिक्षा लो, शिक्षित करो,

जग जीवन रौशन करो ।

घर- घर में दीपक जलाओ,

तिमिर अज्ञान फिर दूर हटेगा,

जनमानस उज्जवल बनेगा,

सफल राष्ट्र हमको मिलेगा ।

हर जन हो मन से तैयार,

सब मिलकर करें शिक्षा प्रचार ,

जो जीत दिलाये बिन हिंसा के,

शिक्षा ही ऐसा हथियार ।

आह्वान कर ,हर कोने कोने,

शिक्षा ये पहुंचानी होगी,

देश के बच्चे – बच्चे में,

साक्षरता अलख जगानी होगी ।

चित्त अन्धेरा छंट जायेगा,

ज्ञान बोध पाने के बाद,

नया सबेरा उग आयेगा,

ज्ञान ज्योति जलने के बाद,

ज्ञान ज्योति जलने के बाद ।

स्वरचित- अनिल बिष्ट(कफोला)🙏🙏@ copy right